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Thursday, 9 January 2014

नारी तेरे कीतने रूप

नारी तेरे कितने रूप, कितना छाँव कहाँ तक धूप??
नारी तेरे कितने रूप|

कभी रूप माता का लेकर,
तुमने तन में प्राण दिया|

जीवन संभले, जीवन संवरे,तुमने अमृत पान दिया|
कितने त्यागों, बलिदानों से,पूरित है तेरा यह रूप?
नारी तेरे कितने रूप||१||

चंदा सी शीतलता तुझमे,
तू ही जिजाऊ रूप है|
तुझमे सावित्री , तुझमे पुत्री, तुझमे मातृ स्वरुप है|

सूर्य प्रभा मण्डल सा चहुँदिशि,
जग में दमके तेरा रूप|
नारी तेरे कितने रूप||२||

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