क्या अंतर पड़ जाएगा,
क्या कमी हो जाएगी....
हम ना होंगे,
ये कोयल गीत फिर भी गाएगी......
रंगो का आंचल ओढ़े,
फूल फिर भी खिला करेंगे...
हम ना होंगे,
ये तितलियाँ इसी तरह मंडरांएगी.....
हर सांझ ढले अंबर,
तारक मणियों का थाल बनेगा....
हम ना होंगे,
भोर ऐसे ही किरनें नई फैलाएगी....
संसार यूँ ही गतिमान रहेगा,
किन्तु लगता है ..
हम ना होंगे, कीमत प्रेम की तब ही समझी जाएगी......
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